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कुशाग्र हत्याकांड: ट्यूशन टीचर, प्रेमी और दोस्त दोषी करार, 26 महीने बाद इंसाफ; भावुक मां बोलीं- फांसी दो

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कानपुर। रायपुरवा के चर्चित कुशाग्र किडनैपिंग और हत्या मामले में मंगलवार को बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया। करीब 26 महीने पुराने इस सनसनीखेज हत्याकांड में अदालत ने ट्यूशन टीचर रचिता वत्स, उसके प्रेमी प्रभात शुक्ला और उसके दोस्त आर्यन गुप्ता उर्फ शिवा को दोषी करार दिया है। एडीजे-11 सुभाष सिंह की अदालत ने तीनों आरोपियों को हत्या, अपहरण और साजिश का दोषी मानते हुए अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है। अब कोर्ट 22 जनवरी को सजा पर अंतिम फैसला सुनाएगी। जैसे ही अदालत का फैसला आया, कुशाग्र की मां सोनिया कनोडिया कोर्ट में फूट-फूटकर रोने लगीं और उन्होंने दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग की।

मंगलवार को तीनों आरोपियों को भारी पुलिस सुरक्षा के बीच अदालत में पेश किया गया। वहीं कुशाग्र के मामा अभिषेक अग्रवाल, बाबा संजय कनोडिया, माता-पिता मनीष और सोनिया कनोडिया तथा अन्य परिजन भी कोर्ट पहुंचे थे। अदालत परिसर में माहौल बेहद भावुक रहा। अभियोजन पक्ष की ओर से इस केस में कुल 14 गवाहों को पेश किया गया, जिनकी गवाही, CCTV फुटेज, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, पंचायतनामा और अन्य दस्तावेजों के आधार पर कोर्ट ने आरोपियों को दोषी ठहराया।

पूरा मामला 30 अक्टूबर 2021 का है। आचार्य नगर निवासी कपड़ा कारोबारी मनीष कनोडिया का बेटा कुशाग्र, जो जयपुरिया स्कूल में हाईस्कूल का छात्र था, उस दिन शाम करीब चार बजे स्कूटी से कोचिंग के लिए निकला था। रास्ते में उसे उसकी ट्यूशन टीचर रचिता वत्स का प्रेमी प्रभात शुक्ला मिला, जिसने बहला-फुसलाकर उसे अपने साथ ले लिया। प्रभात कुशाग्र को ओमनगर स्थित इंद्रकुटी हाता में अपने घर ले गया, जहां पास के कमरे में पहले से रचिता मौजूद थी। इसके बाद प्रभात ने बहाने से कुशाग्र को स्टोरनुमा कमरे में ले जाकर गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी।

हत्या के वक्त प्रभात का दोस्त आर्यन गुप्ता उर्फ शिवा कमरे के बाहर खड़ा रहा। हत्या के बाद तीनों ने मिलकर साजिश के तहत अपहरण की कहानी गढ़ी। प्रभात और आर्यन रचिता की स्कूटी से कुशाग्र के घर पहुंचे और वहां 30 लाख रुपये की फिरौती का पत्र फेंक आए। पुलिस जांच को गुमराह करने के लिए फिरौती पत्र में जानबूझकर “अल्लाह हू अकबर” लिखा गया था। पत्र फेंकते समय फ्लैट के गार्ड राजेंद्र को स्कूटी पर शक हुआ, क्योंकि उसकी नंबर प्लेट से छेड़छाड़ की गई थी। स्कूटी का नंबर पहचान में आते ही उसने कुशाग्र की मां को इसकी जानकारी दी।

इसके बाद परिजन पुलिस के साथ रचिता के घर पहुंचे, जहां उसने पहले खुद को निर्दोष बताया और फिर स्वीकार किया कि उसकी स्कूटी प्रभात लेकर गया था। पुलिस जब इंद्रकुटी हाता पहुंची और तलाशी ली गई तो प्रभात के घर के बाहर बने कमरे से कुशाग्र का शव बरामद किया गया। सख्ती से पूछताछ में रचिता ने कबूल किया कि वह प्रभात से शादी करना चाहती थी और दोनों को पैसों की जरूरत थी, इसलिए उन्होंने कुशाग्र के अपहरण की योजना बनाई थी। फिरौती की रकम से अमीर बनने और हिमाचल प्रदेश में बसने का सपना देखा गया था।

जांच में यह भी सामने आया कि कुशाग्र के जन्मदिन 13 अक्टूबर 2021 को रचिता अपने प्रेमी प्रभात को पहली बार उसके घर लेकर आई थी। उसी दिन प्रभात ने कुशाग्र की दिनचर्या, कोचिंग का समय और आने-जाने के रास्तों की पूरी जानकारी जुटाई थी। इतना ही नहीं, अपहरण से पहले दोनों ने नई कार तक बुक कर दी थी और फिरौती मिलते ही एडवांस देने की तैयारी थी।

पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था और बाद में प्रभात शुक्ला को गैंग लीडर बनाते हुए तीनों पर गैंगस्टर एक्ट भी लगाया गया था। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में यह भी साबित किया कि हत्या के बाद रचिता ने एक घंटे के भीतर प्रभात को 7 से 8 बार कॉल की थीं, जिससे तीनों की मिलीभगत पूरी तरह स्पष्ट हुई।

करीब ढाई साल तक चले इस केस में अदालत के दोषसिद्धि के फैसले के बाद अब सभी की निगाहें 22 जनवरी को होने वाले सजा के ऐलान पर टिकी हैं, जब कोर्ट तय करेगी कि दोषियों को उम्रकैद मिलेगी या फांसी।

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